बुधवार, 23 अगस्त 2023

छोटी चाची की दीदी के साथ सेक्स कहानी | आंटी सैक्स कहानी

चोटी  चाची की दीदी के साथ सेक्स कहानी


चोटी चाची  की प्रसव देखभाल के लिये उनकी दीदी  हमारे घर आयी। चाची    की मोटी गांड और चूचियां देख मेरा लंड खड़ा हो जाता था। मुझे औरत की चूत ठुकाई नहीं आती थी तो चाची    ने मुझे ठुकाई की ट्रेनिंग कैसे दी?




दोस्तो, मेरा नाम विजय कपूर है और मैं कानपुर के एक छोटे से गांव का रहने वाला हूं। बात आज से काफी पुरानी है। उन दिनों मैंने अपनी बाहरवीं की पढ़ाई पूरी की थी।

घर में मेरा एक बड़ा भाई भी है जिसका नाम रमेश है। उन दिनों में रमेश भैया की शादी की बात चल रही थी। मेरे भैया हरियाणा में एक सरकारी महकमे में अफसर हैं। जब उनकी जॉब लगी थी तो उन दिनों में ही उनके ऑफिस में काम करने वाली एक लड़की के साथ उनका टांका फिट हो गया था।

उस लड़की का नाम रेखा था। मेरे भैया उसी से शादी करना चाह रहे थे और मेरे घर वालों को भी इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी। कुछ ही दिनों के बाद उन दोनों का रिश्ता पक्का हो गया और वो दोनों प्रेम विवाह के बंधन में बंध गये। शादी होने के बाद वो लोग हरियाणा में ही रहने लगे।

आगे की पढ़ाई करने के लिये मुझे भी मेरे घरवालों ने हरियाणा जाने के लिये कहा। उनके कहने पर मैं भी तैयार हो गया था क्योंकि भैया और चोटी चाची  पहले से ही वहां पर रह रहे थे।

हरियाणा में भैया-चोटी चाची  के साथ रहकर मैं पढ़ने लगा। मैंने बीएससी में दाखिला करा लिया। इसी समय रेखा चोटी चाची  के पहले प्रसव का समय नजदीक गया तो मदद के लिए चोटी चाची  की दीदी  को बुला लिया गया।

उनका नाम प्रिया था और वो हरियाणा में अकेली ही रहती थीं क्योंकि उनके पति यानि कि मेरे भैया के ससुर का देहान्त हो चुका था और उनका बेटा यानि कि भैया का साला बंगलौर में पढ़ रहा था। चाची    घर पर अकेली ही थीं और इस वजह से उन्हें चोटी चाची  की देखभाल करने में कोई दिक्कत नहीं थी।

प्रिया चाची    की उम्र करीब 45 साल थी, कद पांच फीट चार इंच, रंग गोरा, छाती 42 इंच, कमर 36 इंच चूतड़ 44 इंच के थे। जब चलती थी तो ऐसा लगता जैसे कोई हथिनी अपनी मस्ती में जा रही हो। कहीं जाना होता था तो चाची    साड़ी पहनती थीं वरना घर में पेटीकोट-ब्लाउज या गाउन में रहती थीं।

उनके पहनावे के कारण मैं यह जान गया था कि चाची    नीचे से पैन्टी नहीं पहनती हैं। कई बार मैंने इस बात को नोटिस किया था कि उनकी पैंटी का इम्प्रेशन मेरी नजर में नहीं आया था। आप तो जानते ही हो कि जवानी में लड़कों की नजर औरतों की ब्रा और पैंटी पर ही टिकी रहती है। इसलिए मैं भी चाची    की मोटी सी गांड को ताड़ता रहता था।

भैया चोटी चाची  कहीं जाते तो मैं चाची    ही घर पर होते थे जिस कारण हम लोग आपस में काफी खुल गये थे। मैं धीरे धीरे चाची    की तरफ आकर्षित होने लगा था और उनके ख्यालों में खोकर मुठ मार लेता था। अब धीरे धीरे मेरा मन चाची    की ठुकाई करने के लिए करने लगा था।

कई बार चाची    को चोदने की इच्छा हुई। मगर मुझे समझ नहीं रहा था कि चाची    को उकसाऊं कैसे। इसके लिए मैंने चाची    को चेक करने के लिए चाची    को अपना लण्ड खड़ा करके दिखा कर गर्म करने का प्लान बनाया।

एक दिन घर पर कोई नहीं था। उस दिन मैंने गर्मी का बहाना बनाने की सोची। मैंने अपनी टी शर्ट उतारते हुए चाची    से कहा- आंटी, आज मौसम कुछ ज्यादा ही गर्म है।
चाची    ने मेरी तरफ देखा तो बॉक्सर के अन्दर से मेरे तने हुए लण्ड पर उनकी नजर पड़ गई।

मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था, उसके ऊपर से मैंने लंड में एक झटका भी दे दिया। इससे चाची    को यकीन हो गया कि मेरी जवानी का जोश जोरों पर है। चाची    मेरे लंड को चोर नजर से ताड़ रही थी। मैं अपने मकसद में कामयाब हो गया था।

अब मैं अक्सर ऐसा करने लगा और बहाने बना बनाकर चाची    का ध्यान अपने लण्ड की तरफ खींच लेता। चाची    के हाव-भाव से कभी कभी मुझे ऐसा लगता कि शायद चाची    मेरी मंशा को समझ गई हैं और उनके अंदर भी सेक्स की आग जल उठी है।

हमारे घर के मेन डोर की दो चाबियां थीं जिनमें से एक मेरे पास रहती थी और दूसरी भैया के पास। जो भी घर आता था मेन डोर को खोल लेता था। इसका एक लाभ यह होता था कि चोटी चाची  को भी बार बार दरवाजा खोलने के लिए नहीं आना पड़ता था। चोटी चाची  पेट से थीं इसलिए उनकी सुविधा का पूरा ख्याल रखा जा रहा था।

एक दिन भैया मेरी चोटी चाची  को चेक-अप के लिए अस्पताल लेकर जाने वाले थे। मुझे कॉलेज जाना था। भैया चोटी चाची  के निकलने के कुछ देर बाद मैं कॉलेज के लिए निकला और करीब दो घंटे बाद वापस लौट आया चाबी से मेन डोर खोलकर अन्दर गया।

चाची    बेडरूम में आराम कर रही थीं। बाईं करवट लेटी हुई चाची    ने पेटीकोट ब्लाउज पहना हुआ था। चाची    का पेटीकोट घुटनों तक उठा हुआ था। मैंने थोड़ा सा झुककर देखा तो चाची    की गोरी गोरी जांघें दिखने लगीं।

उनको इस हालत में देख कर मुझसे कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था और आज कुछ कर गुजरने की ठान कर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और बॉक्सर पहनकर चाची    के साथ ही बेड पर चढ़ गया। चाची    आंखें बंद करके लेटी हुई थीं।

मैंने चाची    का पेटीकोट धीरे धीरे ऊपर खिसका कर कमर तक कर दिया तो चाची    की गांड का छेद और चूत दिखने लगी। चाची    की नंगी गांड और नंगी चूत देख कर मेरा लण्ड बेकाबू हो रहा था। मैंने बॉक्सर से बाहर निकाल कर अपने लण्ड का सुपारा चाची    की चूत पर रख दिया और हल्के हल्के से रगड़ने लगा।

तभी अचानक चाची    ने करवट ली और सीधी हो गई। मैं डर गया और चुपचाप लेट गया। मगर अब तो लौड़ा तन चुका था। मैं कब तक बर्दाश्त करता। कुछ देर चुपचाप रहने के बाद मुझसे रहा गया और मैं उठ गया।

मैं उठा और चाची    की टांगों के बीच गया। मैंने चाची    की टांगें फैलाकर चौड़ी कीं तो उनकी चूत का रास्ता खुल गया और चूत के अन्दर का गुलाबीपन चमकने लगा। अपने लण्ड पर थूक लगाकर मैंने अपना लण्ड चाची    की चूत पर रखा और अन्दर पेल दिया।

जैसे ही मेरा लण्ड चाची    की चूत के अन्दर गया तो पता नहीं एकदम से क्या हुआ कि उत्तेजना में मेरे लंड से वीर्य का फव्वारा सा फूट पड़ा और पचर-पचर करके मैंने चाची    की चूत में वीर्य भर दिया।

जब चाची    को इस बात का अहसास हुआ कि मेरी तोप गोला दागने से पहले ही फुस्स हो गयी है तो वो उठ कर बैठ गयीं।
चाची    ने मेरी ओर देखा और बोलीं- पहली बार कर रहे हो क्या?
मैंने डरते डरते कहा- हाँ आंटी।

वो बोली- कोई बात नहीं, अभी तुम नये-नये जवान हुए हो। जवानी के जोश में अक्सर ऐसा हो जाता है। दूसरी बार करोगे तो सही से सीख जाओगे।
चाची    की बात सुन कर मुझे थोड़ी राहत मिली वरना मेरा तो दिमाग ही खराब हो गया था।

फिर चाची    बोली- चलो, पहले खाना खा लेते हैं।

हमने खाना खाया ही था कि भैया मेरी चोटी चाची  को लेकर वापस गये। उस दिन हमें कुछ और करने का मौका नहीं मिला। चोटी चाची  के रहते हुए कुछ कर पाना बहुत मुश्किल हो गया था क्योंकि चाची    भी चोटी चाची  की देखभाल में ही लगी रहती थीं।

चार दिन ऐसे ही निकल गये। चौथे दिन फिर से हमें एक बार दूसरा मौका मिला। उस दिन चाची    खुद मुझे लेकर बेडरूम में गईं और अपने हाथों से मेरे बदन को सहलाने लगीं। क्या बताऊं दोस्तो, कितना मजा रहा था।

फिर चाची    ने मेरे कपड़े उतारे और फिर खुद नंगी हो गईं। चाची    ने मेरा लण्ड मुंह में ले लिया और मेरे लंड को मुंह में लेकर लॉलीपोप के जैसे चूसने लगी। मैं तो हवा में उड़ने लगा। मैंने चाची    को रोक दिया क्योंकि मेरा स्खलन करीब गया था। चाची    उठी और फिर उन्होंने मेरे हाथ अपनी चूचियों पर रख दिये। थोड़़ी देर में चाची    गर्म हो गईं।

गर्म होने के बाद वो बेड पर लेट गईं और अपने चूतड़ उचका कर गांड के नीचे एक तकिया रख लिया। चाची    ने अपनी टांगें फैला लीं और मुझसे कहा- अब मेरी गर्म भट्टी में अपना लंड डालो।

मैंने चाची    की चूत पर लंड को सेट किया और उनकी चूत में लण्ड डाला तो चाची    अपने चूतड़ चलाने लगी और मुझसे कहा- अब अपने लण्ड को अन्दर बाहर करो।

मुझे भी मजा आने लगा। मैं धीरे धीरे चाची    की चूत में लंड को अंदर बाहर करने लगा। पहली बार ठुकाई का मजा मिल रहा था। उस अनुभव को मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता हूं।

एक दो मिनट तक मैंने चाची    की चूत में लंड को अंदर बाहर किया और चाची    ने मेरा साथ दिया। वो जानती थी कि कहां पर मुझे रोकना है। जब उनको लगा कि मैं इससे ज्यादा बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा तो चाची    ने मुझे कुछ पल रुकने के लिए कहा। मैंने वैसा ही किया।

कुछ देर तक मैं रुका रहा और चाची    की चूचियों के साथ खेलता रहा। चाची    ने मुझे चूत में उंगली करने के लिए कहा। मैंने चाची    की चूत में उंगली डाल दी। चाची    की चूत अंदर से गीली हो गयी थी।

मैं चाची    की चूत में उंगली चलाने लगा। चाची    की चूत से पच-पच की आवाज आने लगी। एकदम से मैंने उंगली बाहर निकाली और चाची    की चूत में मुंह लगा दिया। मैं चाची    की चूत को चाटने लगा।

चाची    जोर जोर से सिसकारने लगी- उम्म्हअहहहययाहऔर तेजआह्ह मजा रहा हैतुम तो बहुत जल्दी सीख रहे हो औरत को खुश करना। आह्ह जोर सेअंदर तक जीभ डालो बेटा।

मैं जोर जोर से चाची    की चूत में जीभ को चला रहा था। मुझे पहली बार चूत के रस का स्वाद मिल रहा था। स्वाद थोड़ा अटपटा था लेकिन फिर भी मजा रहा था। मैं चूत को तेजी के साथ चाटता रहा।

जब चाची    से रुका नहीं गया तो इसके बाद चाची    ने मुझे रोका और पलट कर घोड़ी बनते हुए बोलीं- अब पीछे से आकर मेरी चूत में लंड को डालो और पूरा घुसेड़ दो।

मैंने चाची    की चूत पर लंड का सुपारा लगा दिया। चाची    की चूत काफी गीली हो गयी थी। मेरा थूक भी उस पर लगा हुआ था। जैसे ही मैंने दबाव बनाते हुए चूत में लंड घुसाने की कोशिश की तो लंड ऊपर की ओर फिसल कर गांड के छेद में जा घुसा।

चाची    एकदम से चिल्लाते हुए बोली- कहां डाल रहा है नालायक! मेरी गांड को फाड़ेगा क्या? मैंने चूत में लंड डालने के लिए कहा था। चूत में डाल इसको।
मैंने कहा- सॉरी आंटी, गलती से चला गया।

मैंने एक बार फिर से चाची    की चूत के छेद पर लंड को सेट कर दिया और चाची    की चूत में लंड को धकेल दिया। अबकी बार लंड अंदर चूत में फिसल गया। मैं एक बार फिर से आनंद में पहुंच गया।

चाची    की गर्म और गीली चूत में लंड जाने के बाद मैंने तेजी से चाची    की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिये। वो भी मस्ती में अपनी गांड को हिलाते हुए चुदने लगी।

फिर वो बोली- मेरी पीठ पर झुक जा और मेरी चूचियों को दबाते हुए मेरी चूत को चोद।
मैंने वैसा ही किया। मैंने चाची    की चूचियों को पकड़ लिया और उसकी चूचियों को दबाते हुए चूत में लंड का धक्का पेल करने लगा।

इस पोजीशन में चोदते हुए मुझे दोगुना मजा रहा था। इसलिए ज्यादा देर तक मैं टिक नहीं पाया और मैंने पांच-छह धक्के लगाने के बाद ही अपने लंड पर नियंत्रण खो दिया और चाची    की चूत में वीर्य उड़ेल दिया।

फिर मैं थक कर चाची    की के ऊपर ही लेट गया। चाची    की चूचियों पर सिर रख कर मैं अपनी सांस को सामान्य करने लगा। चाची    ने मेरे सोये हुए लंड को एक बार फिर से सहलाना शुरू कर दिया।

दो-तीन मिनट तक सहलाने के बाद चाची    उठ कर मेरी टांगों की ओर गयी। उसने मेरे लंड को मसला और उसका टोपा खोल कर मेरे लंड के सुपारे को चाटना शुरू कर दिया। मेरे लंड में मजा सा आने लगा। चाची    की गर्म जीभ का स्पर्श काफी आनंद और आराम दे रहा था।

फिर चाची    ने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया। तीन-चार मिनट में ही मेरे लंड में तनाव गया और एक बार फिर से मेरा लंड खड़ा हो गया। चाची    तेजी के साथ लंड पर हाथ चलाते हुए मेरे लंड की मुठ मारने लगी।

चाची    के होंठ तेजी के साथ मेरे लंड पर ऊपर नीचे हो रहे थे। जब मुझसे रुका गया तो मैंने चाची    को नीचे बेड पर पटक दिया और उसकी टांगों को फैला कर उसकी चूत में लंड को सेट कर दिया।

धक्का लगाते ही चाची    की चिकनी चूत में लंड घुस गया और मैंने एक बार फिर से चाची    की चूत की ठुकाई शुरू कर दी। अबकी बार का राउंड पंद्रह मिनट तक चला। चाची    इस बीच में झड़ गयी।

उसके चेहरे पर अब संतुष्टि के भाव अलग से दिख रहे थे। कुछ देर के बाद मेरा वीर्य भी निकल गया। फिर हम दोनों शांत हो गये। उसके बाद हम दोनों उठे और हमने खुद को साफ किया।

उस दिन के बाद से चाची    मेरी ट्रेनर बन गयी। जब भी हमें मौका मिलता तो हम दोनों ठुकाई करने में लग जाते थे। चाची    ने मुझे ठुकाई के कई आसन सिखाये। मुझे भी चाची    के साथ ठुकाई का पूरा मजा मिला और इस तरह से मैं औरतों को खुश करना सीख गया।

अब जब भी मौका मिलता था चाची    मेरे लंड को मसल कर तुरंत खड़ा कर देती थी और हमारी ठुकाई शुरू हो जाती थी। हम दोनों जब भी मिलते हैं तो चाची    नये नये आसनों में मुझसे अपनी चूत चुदवाती है।


 
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