रविवार, 3 सितंबर 2023

आंटी की गैर मर्द के साथ सेक्स कहानी | आंटी सेक्स कहानी

 आंटी की गैर मर्द के साथ सेक्स कहानी

यह कहानी एक आंटी  की कामुकता की कहानी है, सेक्स से भरपूर है।

रात के आठ बजे थे, बहुत दिन हो चुके थे अनुसुइयाआंटी  ने अपने पति से ठुकवा कर ठुकाई  नहीं करवाई थी। उसका पति हरिलाल भी घर में ही था इसलिए वह ज्यादा गुस्सा हो रही थी और उसने रामसिंग  से बात करने लिए दुकानदार को फोन लगवाकर रामसिंग  को बुलाया।



अनुसुइयाआंटी - हैलोरामसिंग  को बुलाएंगे क्या एक बार?
उधर से आवाज आई- आप कौन बोल रही हैं?
अनुसुइयाआंटी - बोल देना कि अनुसुइयाका फोन है।

दुकानदार ने रामसिंग  को बुलाने के लिए एक लड़के को भेजा।
लड़के ने कहा- रामसिंग  सेठ, किसी अनुसुइयाका फोन है आपके लिए।

रामसिंग  ने जो काम था, वो बाजू मे रख कर तुरंत जाकर फोन लिया- हैलो आंटी , बोलो?
अनुसुइयाआंटी - रामसिंग  कहां पर हो तुम, मेरी याद आती है या नहीं?

रामसिंग - ओह जानेमन, तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ मैं। बिस्तर पर जब भी जाता हूं तुम्हारे बदन की वो याद और महक लेकर ही सोता हूं, तुम ही हो जो मेरे सपनों में आकर हमेशा वो नॉटी वाली तकलीफ दे कर मेरी नींद हराम कर देती हो।
अनुसुइयाआंटी - सच्ची रामसिंग , मेरे नॉटी रामसिंग गुन्डाराजमैं भी तुम्हें और तुम्हारी गर्माहट को मिस जो कर रही हूं

रामसिंग - ओह आंटी , तुम भी नाआज रात तुम्हारे घर पर आता हूं मैं। लेकिन आंटी  तेरा पति भी तो घर पर है। रात को भी तू बाहर नहीं निकल पाती है।
अनुसुइयाआंटी - रामसिंग , मेरे पास एक आइडिया है। आज ये शराब पीने के मूड में है। तुम ऐसा करना कि रात के ग्यारह बजे तक आना। मैं रात को दरवाजा खुला ही रखूंगी। तुम चुपके से मेरे घर में अंदर आकर बिजली का मेन स्विच बंद कर देना। मैं लाइट जाने का बहाना करके तुम्हारे पास जाऊंगी और तुम्हारी बांहों में खुद को सौंप दूंगी।

रामसिंग - सच में आंटी , तुम्हारे दिमाग को तो मानना पड़ेगा। क्या दिमाग लगाती हो तुम मेरी चुदक्कड़ आंटी मुझे भी आंटी  की बुर  का पानी पीने की प्यास बहुत दिनों से सता रही थी। आज रात को मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा मेरी सेक्सी आंटी

फोन को रखने के बाद रामसिंग  ने दुकानदार को देखा।
दुकानदार बोला- क्या माल पटा कर रखी हुई है तूने रामसिंग ।
रामसिंग - हां यार, क्या बताऊं, मैंने बहुत सी लड़कियों और औरतों को पटा कर चोदा हुआ है लेकिन यह जो सर्विस देती है वो कोई और नहीं देती। साली बिना कॉन्डम के ही मेरे लंड से चुदवा लेती है। कई बार तो मुझे डर भी लगता है कि कहीं कुछ हो जाये लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि अभी तक कुछ नहीं हुआ है।

दुकानदार- हां रामसिंग  सेठ, लेकिन एक बात का ध्यान रखना। इसके पति से बच कर रहना। वो पॉलिटिक्स वाला आदमी है।
रामसिंग - हां, ये बात तो है। चलो ठीक है, मैं जा रहा हूं क्योंकि रात को मुझे निकलना है।

रात के 11 बजे रामसिंग  अनुसुइयाआंटी  के घर पर पहुंच गया और देखा कि अनुसुइयाआंटी  एक सेक्सी सा गाउन पहने हुए खड़ी हुई थी। आंटी  ने रामसिंग  सेठ को अपने घर के पास आते हुए देख लिया था। उसने अपने पति को बोला कि अब बंद भी करो। उसका पति दारू पीने में लगा हुआ था। अनुसुइयाका इशारा रामसिंग  की तरफ था। बंद तो उसको अपने घर की बिजली करवानी थी। आंटी  ने रामसिंग  को आंख मार दी। रामसिंग  ने बिजली बंद कर दी और आंटी  ने रामसिंग  को दूसरे रूम में जाने के लिए चुपके से बोल दिया।

लाइट बंद होते ही हरिलाल की दारू में भंग पड़ गया। वो उठ कर अपने बेड पर चला गया। पांच मिनट के अंदर ही हरिलाल के खर्राटों की आवाज आना शुरू हो गई। रामसिंग  भी ताक में था कि कब आंटी  का पति हरिलाल सोयेगा और वो अपना काम शुरू करेगा।

जैसे ही रामसिंग  को पता चला कि हरिलाल सो चुका है तो पीछे से आकर उसने आंटी  को अपनी बांहों में लपक लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा। आंटी  भी रामसिंग  की बांहों में आते ही चुदासी हो गई।
आंटी  की गांड को छूते ही रामसिंग  का मोटा लंड तनना शुरू हो गया और आंटी  की मोटी गांड के बीच में अपनी जगह तलाशने लगा।

रामसिंग  ने अपने तने हुए लंड को आंटी  की गांड की दरार के बीच में घुसा दिया। कपड़ों के ऊपर से ही जब रामसिंग  का लंड आंटी  की गांड पर लगा तो आंटी  मचल सी गई। उसने पलट कर रामसिंग  के होंठों को चूसना शुरू कर दिया।

रामसिंग  ने आंटी  की कमर पर अपनी बांहों का घेरा बना दिया और उसको अपने आगोश में जकड़ लिया। उसके बाद उसने आंटी  को फिर से पलटा और अपना खड़ा हुआ लंड आंटी  की गांड में घुसाने लगा और आगे की तरफ हाथ ले जाकर आंटी  के मोटे चूचों को दबाने लगा। आंटी  के मुंह से सिसकारी बाहर आना चाहती थी लेकिन साथ में ही पति सो रहा था। इसलिए आंटी  बड़ी मुश्किल से खुद को रोक कर रखे हुए थी। रामसिंग  जोर से आंटी  के चूचों को दबा रहा था।

उसका लंड अपने पूरे आकार में गया था। जब आंटी  से रहा गया तो आंटी  ने पीछे हाथ ले जाकर रामसिंग  के लंड को उसकी पैंट के ऊपर से पकड़ लिया और उसको सहलाने लगी। आंटी  के हाथ में लंड आते ही रामसिंग  की हवस और ज्यादा भड़क गई और वो आंटी  को बुरी तरह से काटने लगा।

आंटी  ने कहा- चलो अंदर चलते हैं। ये शराबी तो अभी नहीं उठने वाला। बहुत दिनों से तुम्हारे लंड के लिए तड़प रही हूं।

रामसिंग  ने आंटी  को अपनी गोद में उठा लिया और फिर कमरे में अंदर ले गया। लेकिन ठुकाई  की जल्दबाजी में वो लोग कमरे को अंदर से लॉक करना भूल गये। लाइट भी नहीं थी इसलिए सोचा होगा कि वैसे भी अंधेरे में क्या कुछ पता लगने वाला है। बेडरूम का दरवाजा बंद किये बिना ही वो चूमा-चाटी में लग गये।

अंदर जाते ही आंटी  ने रामसिंग  की शर्ट और पैंट उतरवा दी और फिर सोफे पर उसको बिठा दिया। रामसिंग  का लंड उसके अंडरवियर में तना हुआ था। रामसिंग  ने अपना अंडरवियर भी उतार दिया और वो सोफे पर बैठा हुआ नंगा हो गया। उसका लंड उसकी जांघों के बीच में ऐसे तना हुआ था जैसे बिल से निकल कर सांप फन उठाये खड़ा हो।

फिर आंटी  ने अपने कपड़े उतार लिये और नंगी होकर रामसिंग  की गोद में आकर बैठ गई। रामसिंग  का तना हुआ लौड़ा आंटी  की गांड के नीचे दब गया। गोद में बैठी हुई आंटी  के चूचों को मुंह लगा कर ऐसे पीने लगा जैसे बहुत दिनों से किसी को पानी नसीब नहीं हुआ हो। लेकिन यहां पर दूध निकालने की कोशिश की जा रही थी। वो जोर से आंटी  के चूचों को पीने में लगा हुआ था आंटी  के मुंह से सीत्कार फूट रहे थे।

रामसिंग  का लंड आंटी  की गांड के नीचे उसकी बुर  में जाने के तड़प रहा था। इधर आंटी  की गांड भी रामसिंग  के लंड पर उछलने के लिए बेताब हुई जा रही थी।
फिर रामसिंग  ही बोल पड़ा- बस आंटी  बसअब और क्यूं तड़पा रही हो। इस पर उछलो ना
आंटी  बोली- आह्ह रामसिंग  … तुम मेरे मन की बात कैसे जान लेते हो। मैं तो खुद तुमसे कहने वाली थी कि अब अंदर डाल दो। मेरी बुर  ने पानी निकाल कर पूरी तैयारी कर ली है।

फिर आंटी  ने अपनी टांगों को फैलाते हुए रामसिंग  के तने हुए लौड़े पर अपनी बुर  को सेट किया उसके तगड़े लंड को अपनी बुर  में लेते हुए बैठती चली गई। आंटी  की गीली चिकनी बुर  में रामसिंग  का लंड उतरने लगा और पूरा का पूरा लंड उतरते ही आंटी  और रामसिंग  के मुंह से एक साथ आह्हनिकल गई।

लंड पूरा का पूरा बुर  में उतर गया था और आंटी  अब रामसिंग  के लंड पर उछलने की तैयारी कर रही थी। आंटी  ने रामसिंग  के गले में बांहें डाल दीं और रामसिंग  के लंड पर उछलना शुरू हो गई। रामसिंग  ने आंटी  के चूचों को मुंह में भर लिया।

उम्म्हअहहहयओहमेरी जानमेरी रानीतुम्हारी गर्म बुर  में लंड देकर तो मैं दुनिया ही भूल जाता हूं।
आंटी  बोली- स्सस्मेरे राजातुम्हारा लंड मेरी बुर  की प्यास और बढ़ा देता है। मैं इसको खा जाऊंगीआह्ह्चोदो मुझे मेरे राजाआह्हह

दोनों ही मस्ती में सेक्स का मजा लेने लगे। उछलने के कारण आंटी  की चूड़ियां खन-खन कर रही थीं। आंटी  की बुर  पच-पच कर रही थी और दोनों की जुबान आह्आहकर रही थी। अपने मजे में वो ये भी भूल गये कि घर में कोई और मर्द भी सो रहा है। वो दोनों ठुकाई  में खोये हुए थे।

लेकिन इसी बीच आंटी  का पति हरिलाल नींद से उठ गया। आंटी  की चूड़ियों की खन-खन सुन कर उसको शक हो गया ये आवाज कहां से रही है। साथ में ही अनुसुइयाआंटी  के मुंह से जो सीत्कार निकल रहे थे उनकी आवाज भी हरिलाल ने झट से पहचान ली।

वो तुरंत उठ कर रसोई में गया और लैम्प जला कर दूसरे बेड रूम की ओर जाने लगा। जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो देखा कि उसकी बीवी किसी और के लौड़े की सवारी कर रही है।

जैसे ही लैम्प की रोशनी कमरे में पहुंची तो अनुसुइयाआंटी  और रामसिंग  की गांड फट गई। दोनों को ही उसके पति ने ठुकाई  करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। वो हक्का-बक्का होकर हरिलाल को देखते ही रह गये।
उनको अंदाजा नहीं था कि हरिलाल नींद से जाग भी सकता है। मगर हरिलाल ने नंगी आंटी  को गैर मर्द के लौड़े के ऊपर देख लिया था।

हरिलाल बोला- साली तू यहां पर किसी और के लंड से ठुकवा रही है। साली रांड। मेरी मां ने सही कहा था तेरे बारे में। वो मुझे बोल कर गई थी कि अपनी बीवी का ध्यान रखना। उस वक्त मैं मां की बात को हल्के में ले गया। लेकिन तू साली चुदक्कड़ यहां दूसरे के लंड के साथ रंगरेलियां मना रही है।

भले ही हरिलाल ने उन दोनों को देख लिया था लेकिन अभी भी रामसिंग  का लंड अनुसुइयाआंटी  की बुर  में ही था और उसने अपनी मलाई अनुसुइयाआंटी  की बुर  में गिरा दी थी। लेकिन बस हरिलाल के आने के कारण धक्के बंद हो गये थे।

अनुसुइयाआंटी  को भी अहसास हो गया था कि रामसिंग  का माल बुर  में निकल चुका है इसलिए उसको एक अलग ही नशा सा चढ़ा हुआ था। हरिलाल की बातों का उस पर कोई खास असर नहीं हो रहा था।
इधर हरिलाल अनुसुइयाको गालियां दे रहा था। साली, तेरी इतनी हिम्मत हो गई कि तू गैर मर्द को मेरे ही घर में बिस्तर पर ले आई।

अनुसुइयाआंटी  बोली- तो क्या करती मैं? तुम्हारे लंड से मेरी बुर  की प्यास नहीं बुझती है। तुम तो दो धक्के लगा कर एक तरफ हो जाते हो।
वीजू- तो साली, सांड का लंड क्यूं नहीं ले लेती।
आंटी  बोली- मैं तो रामसिंग  का ही लूंगी। तुमको जो करना है कर लो।

वन्दना आंटी  ने रामसिंग  की तरफ देख कर कहा- तुम रुक क्यों गये। इस नामर्द से डरने की जरूरत नहीं है। तुम ठुकाई  चालू रखो।
रामसिंग  बोला- लेकिन मेरे लंड का माल बुर  में निकल चुका है।

आंटी  ने रामसिंग  के मुंह पर एक तमाचा मारा और उठ कर झल्लाती हुई नंगी ही कमरे से बाहर निकल गई। रामसिंग  भी उठ कर अपने कपड़े लेकर दरवाजे की तरफ भागा तो हरिलाल ने लैम्प रामसिंग  की गांड पर फेंक कर मारा। रामसिंग  की गांड पर गर्म लैम्प लगा लेकिन वो गांड को मलते हुए घर से बाहर भाग गया।

उसके बाद हरिलाल अनुसुइयाके कमरे की तरफ गया लेकिन अनुसुइयाआंटी  ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था। हरिलाल अपना सिर पीटते हुए दूसरे कमरे में जाकर लेट गया।

 

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