सोमवार, 11 सितंबर 2023

मनीषा चाची के साथ सेक्स कहानी | सगी चाची के साथ सेक्स कहानी

मनीषा चाची के साथ सेक्स कहानी


 कहानी में पढ़ें कि कैसे मैंने चाची की वासना शांत की? चाचा की शादी हुई तो चाची से मेरी दोस्ती हो गयी एक बार चाचा एक महीने के लिए बाहर गए तो




दोस्तो, मेरा नाम अक्षय हैऔर मैं पटना से हूं। आज मैं आपको अपनी लाइफ की सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूं। यह मेरी पहली वासना की कहानी है। मेरी उम्र 22 साल है और मेरा कद 5 फिट 5 इंच है, मेरा रंग सांवला है।

हम अपने परिवार में 6 लोग रहते हैं। मम्मी पापा, चाचा चाची और छोटी बहन हैं। मेरी छोटी बहन का नाम रानी है, जो कि अभी 20 साल की है। मेरी बहन देखने में काफी खूबसूरत है और अभी अभी उसने जवानी की दहलीज पार की है। मेरे पिताजी सरकारी कर्मचारी हैं और मां हाउस वाइफ हैं। मेरे चाचा की मोबाइल की दुकान है, जो कि घर से एक किलोमीटर दूर है। चाचा की अभी अभी शादी हुई है।

मेरी चाची का नाम मनीषा है। मनीषा चाची देखने में बहुत ही खूबसूरत हैं। उनकी फिगर साइज 32-26-34 की है। चाची इतनी अधिक कमनीय और मस्त दिखती हैं कि उनको देख कर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।

जब चाची की शादी हुई थी, तब मैं चाची की ओर उतना ज्यादा आकर्षित नहीं था। मैं चाची की बहुत सम्मान करता था और मैंने उनको शुरुआत में कभी मैली नजर से देखा ही नहीं था। चाची भी घर के सभी सदस्यों का आदर करती थीं। कुछ ही दिनों में मैं चाची के साथ इतना घुल मिल गया था, जैसे हम दोनों क्लोज फ्रेंड हों। चाची भी मुझसे अपनी पर्सनल बातें शेयर करने लगी थीं।

एक बार ऐसे ही बात करते करते चाची ने मुझसे पूछ लिया कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?
मैंने कहा- नहीं है चाची
चाची बोलीं- अरे यार अभी गर्लफ्रेंड नहीं बनाओगेतो कब बनाओगे?
मैंने कहा- चाची, मुझे तो कोई लड़की भाव ही नहीं देती।

चाची हंस पड़ीं और बोलीं कि तुमने इस बात पर ज्यादा गौर नहीं किया होगा। कोई भी लड़की अपनी तरफ से कुछ नहीं कहती। ये तो लड़के को ही कहना पड़ता है।

मुझे उनकी बात सुनकर लगने लगा कि हां ये बात तो सही है, मैंने खुद ही कभी किसी लड़की को प्रपोज नहीं किया है। मैंने सोच में डूब गया।

मुझे देख कर चाची फिर से हंसने लगीं और बोलीं कि अब जब भी किसी को पसंद करो, तो खुल कर इजहार कर देना।
मेरे मुँह से निकल गया कि मैं तो अपनी चाची को ही पसंद करता हूँ।
चाची हंसने लगीं और बोलीं- मगर मैं तो शादीशुदा हूँ।

इस तरह से मैं चाची से अब लड़की को लेकर खुल कर बात करने लगा। मुझे वो लड़कियों की पसंद नापसंद के बारे में बताने लगीं। मेरा उनसे इस टॉपिक पर बात करने में बड़ा मन लगता था।

एक बार अचानक कुछ काम से चाचा को एक महीने के लिए मुंबई जाना हुआ। उस दिन मैंने चाची को बहुत उदास होता हुआ देखा।
मैंने पूछा- क्या हुआ चाचीआप इतनी उदास क्यों हो?
चाची बोलीं- कुछ नहींबस ऐसे ही।
मैंने कहा- चाची आप तो मेरी बेस्ट फ्रेंड हो नाआप मुझे भी नहीं बता सकतीं क्या?
चाची बोलीं- तुम्हारे चाचा एक महीने के लिए मुंबई जा रहे हैं, तो मुझे अच्छा नहीं लग रहा है। मैं क्या करूंमेरा कुछ भी करने का मन नहीं कर रहा है।
मैंने बोला- डोंट वरी चाचीमैं हूं नावैसे भी चाचा एक ही महीने के लिए तो जा रहे हैं ना। एक महीने तो वे बाद वापस ही जाएंगे।

चाची मेरी बात सुनकर कुछ नहीं बोलीं, लेकिन वे मुस्कुरा दीं।

उनकी इस मुस्कराहट के अर्थ को समझ नहीं पाया। बस मुझे लगा कि चाची खुश हो गई हैं, ये बहुत है।

फिर ऐसे ही एक हफ्ता गुजर गया। चाची की बेचैनी और भी ज्यादा बढ़ती गई। अब तो मुझे भी चाची को अकेला छोड़ना अच्छा नहीं लगता था।

फिर एक दिन में चाची के कमरे में बिना दरवाजा खटखटाए अन्दर चला गया, तो मैं देख कर दंग रह गया। चाची पलंग में लेटी थीं और वासना के वशीभूत जोर-जोर से अपनी चूचियों को दबा रही थीं। लेकिन मेरे इस तरह से अन्दर जाने से चाची भी सकपका गईं और उन्होंने शर्म से सिर झुका लिया।

मैंने उनसे पूछा- चाची आप ये क्या कर रही थीं?
चाची- कुछ नहीं अक्षयतुम्हारे चाचा की याद बहुत सता रही थी।

अब मुझे भी लगा कि चाची को चाचा की जरूरत नहींबल्कि लंड की जरूरत है।

मैंने चाची से कहा- चाची मैं आपकी समस्या दूर कर सकता हूं, पर उसके लिए आपको एक काम करना पड़ेगा।
चाची बोलीं- कौन सा काम?
मैंने बोला- अभी नहीं शाम को बताता हूं।

फिर मैं शाम होने का इंतजार करने लगा। शाम को हम सभी ने खाना खाया और मैं टीवी देखने लगा। जब सब सोने चले गए, तो मैं चाची के पास उनके कमरे में चला गया।

जब मैं अन्दर गया, तो देखा कि चाची मोबाइल में कुछ देख रही थीं। मेरे अन्दर जाते ही चाची चौंक गईं और उन्होंने मोबाइल को नीचे रख दिया।

मैंने कहा- क्या कर रही हो चाची?
चाची बोलीं- कुछ नहींगेम खेल रही थी, वैसे आप कुछ बताने वाले थे ना!
मैं- हां चाची मैं आपको इस तरह से उदास नहीं देख सकताचाची मुझे पता है कि आप पर क्या बीत रही है।

इतना कह कर मैं चाची की तरफ देखने लगा। चाची भी मेरी ही बात को पूरा सुनने के लिए बेचैन सी दिखीं।

मैंने अपनी बात को जारी रखा। मैंने कहा- चाची अगर आप बुरा मानो, तो मैं आपकी समस्या को दूर कर सकता हूँ।
चाची- आपको जो भी कहना है, साफ़ साफ़ कहो।
मैंने कहा- पहले आप वायदा करो कि आप मेरी बात से बुरा नहीं मानेंगी। यदि मेरी बात आपको पसंद आए, तो मुझसे साफ़ बता देना।

चाची कुछ कुछ समझ गई थीं।

वे बोलीं- हां हां आप मेरे बेस्ट फ्रेंड होमैं आपकी किसी बात का बुरा नहीं मानूँगी।
मैंने कहा- चाची, मैं आपके साथ सेक्स करना चाहता हूं।

तब चाची एक पल के लिए चुप हो गईं, फिर बोलीं- मैं तो खुद भी यही चाहती थीपर आपसे बोल नहीं पा रही थी।
मैंने कहा- हां चाची, मुझसे आपका दुःख देखा नहीं जा रहा था। मगर मैं कुछ कह भी नहीं पा रहा था। मगर मुझे आपकी वो बात याद गई, जब आपने कहा था कि लड़कियां अपनी तरफ से पहल नहीं करती हैं। लड़के को ही पहल करना चाहिए।

ये कहते हुए मैंने चाची को अपने गले से लगा लिया। इस पर चाची ने भी मुझे सहयोग किया। मैं अब चाची को चूमने लगा। चाची ने भी मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़ लिया।

मैं चाची के होंठों को बेइंतेहा चूमने लगा। चाची भी होंठों से होंठों को चिपका कर मेरा पूरा साथ दे रही थीं। हम दोनों ने कम से कम दस मिनट तक एक दूसरे से चूमाचाटी करते रहे। फिर मैंने पहले कमरे की कुंडी लगाई और उनके पास गया।

मैंने चाची की साड़ी उतारी और उनका ब्लाउज भी निकाल दिया। उनकी ब्रा देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया था। एकदम झीनी सी जाली वाली स्किन कलर की ब्रा थी। उसमें से चाची के मम्मे एकदम साफ़ दिख रहे थे। मैंने पहले नीचे का पेटीकोट भी निकाला और चाची को ब्रा पेंटी में ला दिया।

चाची के गोरे बदन को देख कर मेरा तो और भी नशा बढ़ गया था। चाची ने अपने हाथों से मेरी टी-शर्ट और लोअर उतार दिया। अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था और चाची पैंटी और ब्रा में थीं। मैं चाची के पूरे बदन को चूमने लगा।

फिर मैंने चाची की ब्रा का हुक खोल दिया और उनके दोनों मम्मों को आजाद कर दिया।

उनके मस्त रसभरे चूचे हवा में फुदकने लगे थे। मैंने उनके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसना शुरू कर दिया। चाची खुद अपने हाथ से मुझे अपने दूध चुसवा रही थीं। निप्पल चूसे जाने से चाची की वासना शिखर पर गई थी। वे मेरा सर पकड़ कर अपने मम्मे चुसवाते हुए मस्त सीत्कार कर रही थीं। मैंने चाची के मम्मों को इतना ज्यादा चूसा कि चाची की चूचियां एकदम लाल हो गईं।

अब मैंने अपना लंड निकाला और चाची के हाथ में रख दिया। चाची मेरा लम्बा लंड देखकर एकदम से चौंक गईं।
मैंने पूछा- क्या हुआ चाची?
वे बोलीं- इतना बड़ा लंड माइ गॉडतुम्हारे चाचा का तो इससे बहुत छोटा है।
मैंने कहा- आपको पसंद आया?

चाची मेरे लंड को प्यार से सहलाने हुए उससे खेलने लगीं। वे बोलीं- इस प्यारे से औजार से कौन लड़की प्यार करेगी।
मैंने कहा- लंड को प्यार करने का क्या ये तरीका ठीक है?
चाची बोलीं- मतलब?
मैंने कहा- यदि आपको लंड प्यारा लग रहा है, तो इसे मुँह में लेकर प्यार करो न।

चाची तो शायद मेरे मुँह से यही सुनना चाह रही थीं। उन्होंने मेरा लंड झट से अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं। चाची ने मेरे पूरे लंड को अपने गले तक उतार लिया और 10 मिनट तक चूस चूस कर आगे पीछे करती रहीं। मुझे चाची के मुँह की गर्मी से अपने लंड की मालिश करवाना बड़ा अच्छा लग रहा था।

कोई दस मिनट की लंड चुसाई के बाद मेरा माल निकल गया। चाची ने मेरे लंड रस को अपने मुँह में ही पूरा ले लिया और गटक लिया।

अब मैंने चाची की पेंटी निकाली और अपने मुँह से उनकी बुर को चाटने लगा। मेरी जीभ के स्पर्श से चाची की सिहरन ने मुझे बता दिया था कि चाची कितनी अधिक चुदासी हो गई हैं। मैंने अपनी पूरी जीभ को चाची की बुर की गहराई तक डाल दिया और बुर को चूसने लगा।

चाची ने भी अपने हाथों से मेरा सिर जोर से अपनी चुत में दबा लिया और सेक्स भरी आवाज से कहने लगीं- आह कितना मस्त बुर चूसते होआह खा जाओ अक्षयमेरी बुर को खा जाओआहहचूसो चूसो खा जाओ अअम्मआंहमर गयीअक्षय अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा हैअब मेरी चुत में अपना लंड पेल दो।

फिर मैंने अपना लंड चाची की चुत में रखा और एक ही धक्के में आधा लंड पेल दिया। चाची की चीख निकल गई। उनके मुँह से गाली निकलने लगी- अबे चाचीचोद कमीनेसाले आराम से पेल मैं कहीं भाग नहीं रही हूँ।

चाची की ऐसी बात सुनकर मुझे और जोश गया और मैंने फिर से एक जोरदार धक्का दे दिया। इस बार के धक्के से मेरा पूरा का पूरा लंड चाची की चुत में समा गया।

चाची फिर से चीख पड़ीं- उम्म्हअहहहयओहबहनचोदजान लेगा क्या

फिर मेरे मुँह से भी गाली निकलने लगी- साली रंडी कुतियाआज तो तेरी इतनी ठुकाई करूंगा कि फिर कभी किसी और के लंड को लेने का नाम नहीं लेगी।

चाची बोलीं- अबे चूतियेसाले गंडफटतेरी चाची तो कब से तेरी रंडी बनने को तैयार थीतू ही चूतिया थाइतने दिन लगा दिए अपनी चाची को रंडी बनाने मेंआह अब जरा धीरे चोदमेरी बुर चोदना हैफाड़ना नहीं है।

मैं चाची की बात सुनकर मस्त हो गया। अब मैं उनकी इतनी जोर से ठुकाई कर रहा था कि मेरे हर धक्के में उनकी आह निकल रही थी। पूरा कमरा में फच्च फच्च की आवाज से गूँजने लगा था।

फिर मैंने चाची को बोला- चाची मुझसे ही पूरी मेहनत करवाओगी। मैं ऊपर से नहींअब नीचे से चोदना चाहता हूँअब आप मेरे लंड के ऊपर आओ।

चाची मेरे ऊपर मेरे लंड पर बैठकर ज़ोर ज़ोर से ऊपर नीचे करने लगीं। इस दौरान चाची की चूचियां भी जोर जोर से हिल रही थीं। मैं उनके मम्मे मसलता हुआ उनकी ठुकाई कर रहा था।

करीब 20 मिनट की ठुकाई के बाद चाची झड़ने लगीं। चाची की मुँह से एक मदहोशी से भरी तेज आवाज निकली- आहमैं गईआह।मर गई।।
उनका रस निकलने लगा। इस वक्त चाची की बुर इतनी गर्म लग रही थी जैसे ज्वालामुखी से लावा फूट रहा हो।

झड़ने के बाद चाची मेरे ऊपर ही निढाल पड़ गईं। फिर मैंने चाची को नीचे किया और मैं उनकी ठुकाई करने लगा। पर मैं उनकी गर्मी को ज्यादा समय तक नहीं झेल पाया और मैं भी झड़ने वाला हो गया था।

मैं- चाची मेरा निकलने वाला हैकहाँ डालूं?
चाची बोलीं- मेरी बुर की गहराई में ही डाल दे।

फिर मैंने 10-12 झटके देने के बाद चाची की बुर में अपना पानी छोड़ दिया।

इस घमासान ठुकाई के बाद चाची की आँखों में एक अलग ही खुशी दिखी।

मैंने कहा- चाची आप खुश तो हो !
चाची बोलीं- हाँ मैं आज बहुत खुश हूं, लेकिन मुझे एक बात का अफसोस है।
मैं- क्या बात चाची?
चाची बोलीं- मैं तुमसे पहले ही क्यों नहीं चुद गई।
मैंने कहा- डोंट वरी मेरी जानअब तो हम रोज ठुकाई करेंगे।

उस रात मैंने चाची को पांच बार चोदा।

 
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