सोमवार, 25 दिसंबर 2023

प्रीति की पलंगतोड़ चुदाई | भाई बहन सेक्स कहानी

 प्रीति की पलंगतोड़ चुदाई

मैं एक 27 साल की खूबसूरत सेक्सी औरत हूँ।मेरा नाम प्रीति है, मेरा मर्द मुझसे 3 साल बड़ा है और वो एक उद्योगपति है। वो काम में एकदम पागल आदमी है। बिजनेस के सिवाय उसको कुछ नहीं दिखता। उसके व्यस्त होने के कारण हम एक दूसरे के साथ बहुत कम मिल पाते हैं।



हमारा अभी तक कोई भी बच्चा नहीं हुआ है। शुरू के दो तीन साल में हम लोगों की सेक्स लाइफ बहुत ही अच्छी थी। उसके बाद वो काम के चक्कर में बहुत फँस गया और मैंने किट्टी पार्टी और लेडीज़ पार्टी जॉयन कर ली।

इस तरह की किट्टी पार्टी और लेडीज पार्टी में सिर्फ़ शराब ब्लू फ़िल्म चलती थी। औरतों में पुद्दी चूमना और पुद्दी चाटना खुले रूप में होता था। मुझे भी दिल बहलाने का बहाना मिल गया था। मैं इसमें बहुत खुश थी।

एक बार होली पर मेरा पति अपने काम से बाहर गया हुआ था। मैं लेडीज किट्टी पार्टी में चली गई। उस दिन किट्टी पार्टी में बहुत शराब पी गई और हम लोगों ने ताश भी खेले।

फिर हम औरतों ने एक हिन्दी पोर्न फ़िल्म भी देखी जो बहुत ही गर्म थी। उसके बाद हम औरतों ने चुम्मा चुम्मा खेला और पुद्दी चटाई भी की। यह सब रात के तीन बजे तक चलता रहा। मैंने बहुत शराब पी ली थी और मुझे घर तक मेरी एक सहेली अपनी कार में छोड़ गई।

घर पर मेरे भाई राजेश ने सहारा देकर मुझे मेरे बेडरूम तक पहुँचाया। मैंने इतनी शराब पी रखी थी कि मैं ठीक तरह से चल भी नहीं पा रही थी। आज मैं किट्टी पार्टी में गर्म पोर्न मूवी देख कर बहुत ही गर्म हो गई थी।

मेरी चुन्चियाँ बहुत फड़क रही थीं और मेरी पुद्दी से पानी निकल रहा था जिससे मेरी पैंटी तक भीग गई थी। जैसे ही मेरा भाई मुझको सहारा देकर मेरे बेडरूम तक ले आया, मेरा मन उसी से पुद्दी चुदवाने का हो उठा।

मेरा भाई राजेश एक 20 साल का हट्टा कट्टा नौजवान है। मैं अपने बेडरूम में आकर एक कुर्सी पर बैठ गई और जानबूझ कर अपना पल्लू गिरा दिया जिससे कि राजेश मेरी चुंचियों को देख सके। मैंने उस दिन एक बहुत ही छोटा ब्लाउज पहन रखा था और उसका गला बहुत ही लो-कट था।

राजेश का लंड मेरी चुन्ची देख कर धीरे धीरे खड़ा होने लगा और उसको देख कर मैं और चुदासी हो गयी। मुझे लगा कि मेरा प्लान काम कर रहा है। उसकी पैंट तम्बू के जैसे उठने लगी। मैं धीरे से मुस्कराई और मैंने हाथ से अपने बाल पीछे कर लिये।

मैं जानबूझ कर उसको अपनी चुन्ची की झलक दिखाना चाहती थी। मैं अपने कन्धों को और पीछे ले गई जिससे कि मेरी चुन्ची और ज्यादा बाहर की तरफ़ निकल गई।

उसकी पैंट और अधिक उठने लगी और मैं मन ही मन मुस्करा रही थी। मुझे यकीन था कि मेरा काम बन जाएगा। उसके लंड के उठाव को देख कर लग रहा था कि थोड़ी ही देर में मैं उसकी बाँहों में होऊंगी और उसका लंड मेरी पुद्दी अच्छी तरह से कसकर चोद रहा होगा।

मैंने अपने भाई से कहा- जाओ दो गिलास और एक स्कॉच की बोतल हमारे कमरे से ले आओ!
वो बोतल उठा लाया। एक पैग मैंने अपने लिये बनवा लिया और उसको भी पीने के लिए कहा।

वो भी शायद अपनी बहन की ठुकाई का सपना देख रहा था इसलिए मेरा हर कहा मान रहा था।
वो भी मेरे सामने खड़ा होकर शराब पीने लगा और उसका लंड मैं उसकी पैंट में तना हुआ साफ देख पा रही थी।

पूरा गिलास खाली करने के बाद मैंने अपने ब्लाउज के ऊपर से अपनी चुन्चियों को मसलना शुरू किया। राजेश अभी भी अपने होंठों से गिलास को लगाये हुए था लेकिन उसकी नज़र मेरे हाथों पर थी जो मेरी चुन्चियों को दबाने लगे थे।

ये देखकर उसका मुंह खुला का खुला रह गया। मैं भी उसको तड़पा कर मजा ले रही थी। मैं उसकी पैंट की तरफ़ देख रही थी, जो अब तक बहुत ही फूल चुकी थी। मैं समझ गई कि उसका लंड अब बिल्कुल फटने को हो गया है और वो मुझे चोदने के लिए पागल हो चुका है।

फिर मैंने ब्लाउज को खोल दिया और अपने बड़े बड़े स्तनों को उसके सामने आजाद कर दिया। मैं अपने दोनों खरबूजों को सहलाने और मसलने लगी। राजेश मेरे आधे नंगे जिस्म को बहुत अच्छी तरह से देख रहा था।

मैंने मादक सी आवाज में उससे पूछा- क्या हुआ राजेश, क्या देख रहे हो?
वो कुछ नहीं बोल पा रहा था। उसका चेहरा वासना और आश्चर्य से भरा हुआ था। उसके माथे पर पसीना गया था।

फिर मैंने उसके लंड की ओर देखकर कहा- लगता है तुम्हारा खड़ा हो गया है। क्या तुम इसको शांत नहीं करना चाहोगे?
मैंने अपनी साड़ी के ऊपर से अपनी पुद्दी पर हाथ फिराते हुए कहा।

अपनी ही जुबान से निकल रही इस तरह की गन्दी बातों से मैं और ज्यादा उत्तेजित हो रही थी। मेरी पुद्दी उसका लंड खाने के लिए फड़फड़ाने लगी। मेरे दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी कि कब राजेश का लंड मेरी पुद्दी में घुसेगा और मुझे जोर जोर से चोदेगा।

मैं अपने कपड़ों को धीरे धीरे से खोलने लगी और यह देख कर राजेश की आँखें फैलने लगीं। मैंने धीरे से अपनी साड़ी उतार दी। मैंने अपना पेटीकोट भी धीरे से उतार फेंका और फिर पैंटी भी उतार डाली।

अब मैं अपने भाई राजेश के सामने बिल्कुल नंगी हो कर खड़ी हो गयी। राजेश मुझको फ़टी आँखों से देख रहा था। मेरी बाल सफा, भीगी पुद्दी उसकी आँखों के सामने थी और वो उसके लंड को लीलने के लिए बेताब हो रही थी।

मैंने राजेश से धीरे से पूछा- ओह राजेशकब तक देखते रहोगे? आओमेरे पास आओ, और मुझे चोदो। देख नहीं रहे हो मैं कब से अपनी पुद्दी खोले चुदासी हुई पड़ी हूँ? आओ, पास आओ और अपने मोटे लंड से मेरी पुद्दी को खूब अच्छी तरह से रगड़ कर चोदो!

मेरी इस बात को सुन कर वो हरकत में गया। वो मेरे सामने अपने कपड़े उतारने लगा। उसने पहले अपनी शर्ट को उतारा। फिर उसने अपनी चड्डी भी धीरे से उतार फेंकी। चड्डी उतारते ही उसका लंड मेरी आंखों के सामने गया।

उसका लंड इस समय बिल्कुल खड़ा था और चोदने को बेताब होकर झूम रहा था। मैं उसके लंड को बड़ी बड़ी आँखों से घूर रही थी। उसका लंड मेरे पति के लंड से ज्यादा बड़ा और मोटा था।

मैं उसका लंड देख कर घबरा गयी थी लेकिन मेरी पुद्दी उसके लंड को खाने के लिए फड़फड़ा रही थी। मैं अपनी कुर्सी से उठ कर उसके पास जाने लगी, लेकिन मेरे पैर लड़खड़ा गए। मैं गिरने लगी और राजेश ने आकर मुझको अपने बदने से चिपका कर संभाल लिया।

एक झटके में राजेश का हाथ मेरी चुन्ची पर था। वो मेरी एक चुन्ची को अपने मुंह के अन्दर लेकर चूसने लगा। मैं बहुत शराब पीने के कारण खड़ी नहीं हो पा रही थी। मैं फर्श पर गिर पड़ी।

राजेश ने मुझको फट से पकड़ लिया और हम दोनों कार्पेट पर गिर गए। राजेश का हाथ मेरी चुन्ची पर था और राजेश वैसे ही पड़ा रहा। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
मैंने धीरे से राजेश से कहा- राजेश मेरी चुन्ची तो दबाओ, खूब जोर से दबाओ, इनको अपने मुंह में लेकर चूसो, इनसे खूब खेलो।

इतना सुनते ही राजेश मेरे ऊपर टूट पड़ा और मेरी चुंचियों से खिलवाड़ करने लगा। मैंने अपना दाहिनी तरफ का दूध उसके मुंह पर लगा दिया और कहा- आह्हलोइसे अपने मुंह में लेकर खूब जोर से चूसो।

राजेश मेरे दूध को मुंह में लेकर चूसने लगा। मैं अपनी कामवासना में पागल हो रही थी। मेरी पुद्दी से पानी निकल रहा था। राजेश मेरी दोनों चुंचियों को बारी बारी से मसल रहा था और चूस रहा था।

मैं उसकी दूध चुसाई से पागल सी हो गयी और उसका एक हाथ पकड़ कर अपनी पुद्दी पर ले गयी। मेरी पुद्दी को छूते ही राजेश ने पहले मेरी पुद्दी के मोटे मोटे उभरे हुए होंठों पर हाथ फिराया और अपनी बीच वाली उंगली को मेरी पुद्दी में घुसा दिया।

मेरा भाई अब मेरी पुद्दी को अपनी उंगली से चोद रहा था। अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने अपने दोनों हाथों से राजेश का लंड पकड़ लिया और उसको मसलने लगी।

राजेश के मुंह से सीसीकरके सिसकारियां निकलने लगीं। मैंने भाई का लंड पकड़ कर उसका सुपारा निकाल लिया और उस पर एक चुम्मा जड़ दिया। राजेश अब जोर जोर से मुझे अपनी उंगली से चोद रहा था।

मैं राजेश का लंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी और वो अपने लंड को मेरे मुंह में जोर जोर से ठेलने लगा। थोड़ी देर के बाद मुझको लगा कि राजेश अब झड़ जायेगा।

सिसकारते हुए मैं बोली- आह्ह राजेशचोदचोदअपनी दीदी के मुंह को खूब जोर जोर से चोद और अपना माल अपनी दीदी के मुंह में गिरा दे।

थोड़ी देर के बाद राजेश सिसकारते हुए बोला- आह्हदीदीमैं झड़ रहा हूँ।
उसने अपना सारा माल मेरे मुंह में डाल दिया। मैंने उसके लंड का माल पूरा का पूरा पी लिया।

मैंने धीरे से राजेश से पूछा- अपनी दीदी को चोदेगा? तेरे जीजा की बहुत याद रही है। मेरी पुद्दी बहुत प्यासी हो रही है।
राजेश ने मेरी दोनों चुंचियों को पकड़ कर कहा- दीदी अपनी पुद्दी पिलाओ ? पहले दीदी की पुद्दी चूसूंगा, फिर जी भर कर चोदूंगा।

राजेश का लंड मैं अपने हाथों में पकड़ कर खेल रही थी।
मैंने कहा- तेरा लंड तो बहुत विशाल है रे!
उसने पूछा- आपको पसंद आया दीदी?
उसका लंड हाथ से सहलाती हुए मैं बोली- यह तो बहुत प्यारा है। किसी भी लड़की को चोद कर मस्त कर देगा।

फिर मैं चित होकर पुद्दीड़ों के बल लेट गयी और अपनी टांगें फैला कर बोली- लेअपनी दीदी की पुद्दी को प्यार कर। जी भर कर पी ले इसे। पूरी रात पीता रह अपनी दीदी की पुद्दी।

राजेश मेरी पुद्दी को जीभ से चाटने लगा। वो मेरी पुद्दी को पूरी अंदर तक चाट रहा था। कभी कभी उसकी जीभ मेरी पुद्दी के मटर-दाने पर भी चाटने लगती थी। कभी वो उसको दांतों में लेकर काट देता था और मैं पागल हो जाती थी।

अपनी पुद्दी चटाई करवाते हुए मैं बिल्कुल पागल हो गयी और बड़बड़ाने लगी- आआआह्हहमेरे राजा भैया, बहुत मजा रहा है। चूसो, खूब जोर से चूसोओहओईईओहपी जा इसे।

मैं उसका सिर पकड़ कर उसके मुंह में अपनी पुद्दी को पुद्दीड़ उछाल उछाल कर रगड़ रही थी। मैं उसकी पुद्दी चटाई से बिल्कुल पागल हो गयी और राजेश के मुंह पर ही झड़ गयी।

राजेश मेरी पुद्दी से निकला पूरा का पूरा पानी पी गया।
मैं फिर से बड़बड़ाने लगी- ओह राजेशअब अपनी दीदी को चोद दे। अब नहीं रुका जा रहाअपने लंड को मेरे पुद्दी में घुसा देपेल दे अपने लंड को मेरी पुद्दी मेंप्लीज़ राजाअब चोदो ना!

अब वो मेरी टांगों के बीच में गया और अपने लंड का सुपाड़ा मेरी पुद्दी के मुंह पर रख कर धक्का लगाने लगा। उसका लंड फिसल रहा था।
मैं हंस पड़ी और बोली- साले अनाड़ीबहनचोद, चोदना आता नहीं, चला है दीदी को चोदने! बहनचोद कहीं का!

मैंने उसका लंड पकड़ कर अपनी पुद्दी के मुंह पर लगा दिया और कहा- चल अब देर मत कर और अपनी दीदी को चोद चोदकर उसकी पुद्दी की आग को ठंडा कर।

राजेश के पुद्दीड़ों को पकड़ कर मैंने अपने हाथ से खूब जोर से दबा दिया और अपने पुद्दीड़ उछाल कर राजेश का लंड अपनी पुद्दी में ले लिया। राजेश का लंड पूरा का पूरा मेरी पुद्दी में घुस गया।

मैं मस्ती में आकर चिल्ला पड़ी- आआह्हहहायराजेशमजा गयालंड गयाआह्हचोद अब सालेपेल दे मेरी पुद्दी कोआईईचोद जल्दी कुत्ते। आज सालों बाद इतनी हसीन ठुकाई हो रही है इस छिनाल पुद्दी-रानी की। साली को लंड लेने का बहुत शौक था। चोद दो इसकोफाड़ दो।

राजेश अब एक्शन में गया और मेरी पुद्दी में लंड को पेलने लगा। मैं मस्त होने लगी। उसका लंड बहुत मोटा था और वो मेरी पुद्दी को दो फांकों में फाड़ रहा था। राजेश के लंड से चुदवाते हुए मैं बिल्कुल सातवें असमान पर थी।

मैंने अपनी टांगों को उठा कर राजेश के पुद्दीड़ों पर लॉक कर दिया और उसके कंधों को पकड़ कर उसके लण्ड के धक्कों को अपनी पुद्दी में खाने लगी।

राजेश अपने धक्कों के साथ साथ मेरी चुन्ची को भी पी रहा था। मेरा पूरा बदन राजेश की ठुकाई से जल रहा था और मैं अपने पुद्दीड़ उछाल उछाल कर उसका लण्ड अपनी पुद्दी से खा रही थी।

मैं लण्ड खा कर पूरी तरह से मस्ता गई और बोली- राजेश! आज पूरी रात तू इसी तरह मुझे चोदता जा। तू बहुत अच्छी तरह से चोद रहा है। तेरी ठुकाई से मैं और मेरी पुद्दी बहुत खुश हैं। मुझे नहीं मालूम था कि तू इतना अच्छा और मस्ती से चोदता है।

राजेश बोल रहा था- हाय दीदी! मैं आज पूरी रात तुमको इसी तरह चोदूंगा। तुम्हारी पुद्दी बहुत गर्म है, इसमें बहुत मस्ती भरी हुई है। अब यह पुद्दी मेरी है और इसको खूब चोदूंगा।

मैं मस्ती से पागल हो रही थी और मेरी पुद्दी पानी छोड़ने वाली थी। राजेश अब जोर जोर से मेरी पुद्दी चोद रहा था। वो अब अपना लण्ड मेरी पुद्दी से पूरा निकाल कर फिर से पूरा का पूरा मेरी पुद्दी में जोरों से पेल रहा था।

भाई के मोटे लंड से चुदते हुए मेरी पुद्दी अब तक दो बार पानी छोड़ चुकी थी। मैं उसके हर धक्के का आनन्द उठा रही थी। हम दोनों अब तक पसीने से नहा गए थे।

राजेश अब अपनी पूरी ताकत के साथ मुझे चोद रहा था और मैं सोच रही थी कि काश आज की रात कभी खत्म ना हो। थोड़ी देर बाद राजेश चिल्लाया- आह्हओह्हदीदीअब मेरा लण्ड पानी छोड़ने वाला है, अब तुम अपनी पुद्दी से मेरे लण्ड को कस कर पकड़ो।

इतना कहने के बाद राजेश ने करीब दस-बारह धक्के और लगाये और वो मेरी पुद्दी के अन्दर झड़ गया और मेरी चुन्चियों पर मुंह रख कर लेट गया।

उसके लण्ड ने बहुत सारा पानी छोड़ा था और अब वो पानी मेरी पुद्दी से बाहर रहा था। मैंने राजेश को कस कर अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसका मुंह चूमने लगी। उसको चूमते चूमते और उसके लंड को पुद्दी में महसूस करते करते मेरी पुद्दी ने तीसरी बार पानी छोड़ दिया।

थोड़ी देर बाद हम दोनों उठकर बाथरूम गए और अपनी पुद्दी और लौड़े को साफ किया। राजेश का लण्ड अभी तक सख्त था। मैं उसका लण्ड हाथ में ले कर सहलाने लगी और फिर उसके सुपाड़े पर चुम्मा दे दिया। फिर हम दोनों नंगे ही बिस्तर पर जाकर लेट गए औए एक दूसरे के लण्ड और पुद्दी से खेलते रहे।

कुछ देर खेलने के बाद राजेश का लण्ड फिर से खड़ा होने लगा। उसे देख कर मैं भी मस्ती में गई। मैंने उसके लण्ड का सुपारा खोल दिया। उस समय लंड का सुपारा बहुत फूला हुआ था और चमक रहा था। मैंने झुक कर उसको अपने मुंह में ले लिया और मस्ती से चूसना शुरू कर दिया।

चूसने के कुछ देर बाद राजेश बोला- दीदीअब मेरा लण्ड छोड़ दो, नहीं तो मेरा पानी निकल जायेगा।

मैं उससे एक बार और चुदाना चाहती थी इसलिए मैंने उसका लण्ड अपने मुंह से निकाल दिया और बोली- अब तेरा लण्ड अच्छी तरह से खड़ा हो गया है और मेरी पुद्दी में घुसने को तैयार है। चलजल्दी से मेरे ऊपर और मेरी प्यासी पुद्दी को अच्छी तरह से चोद दे।

यह सुनते ही राजेश मेरे ऊपर गया और अपना पूरा का पूरा लण्ड मेरी पुद्दी में एक झटके में ही पेल दिया। उसने मेरी पुद्दी को दोबारा खूब अच्छी तरह से चोदा और मैं उसकी ठुकाई से निहाल हो गई।

उस रात हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गए। उस दिन के बाद से मैं और राजेश जब भी घर में अकेले होते हैं तो हम कपड़े नहीं पहनते हैं और नंगे ही रहते हैं। चूसा चुसाई और चोदम ठुकाई का खेल चलता है और हम भाई-बहन खूब जम कर ठुकाई करते हैं



 
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