सोमवार, 29 जनवरी 2024

बबली भाभी की ब्रा की हुक | babali bhabhi sex stories

 बबली भाभी की ब्रा की हुक 

मेरा नाम गणेशहै। मैं 20 साल का हूँ। मैं सूरत का रहने वाला हूँ। मेरे लंड की साइज़ 5.6 इंच है। मुझे आंटी  और  भाभी बहुत पसंद हैं। मैं आज आपको अपने जीवन में घटी एक मस्त देसी कहानी सुनाने जा रहा हूँ। ये देसी ठुकाई की कहानी आपको पसंद आएगी ऐसी मैं आशा रखता हूँ।



जब मैं 19 साल का था तब मेरी पड़ोस में एक भईया बबली भाभी रहते थे। वे बबली भाभी 30 साल की थीं, पर लगती 25 साल की थीं, उनका फिगर 35-34-37 का था। बबली भाभी के दो बच्चे थे, वो दोनों हॉस्टल में रहकर पढ़ते थे। उनके घर का जो भी छोटा-मोटा काम होता, तो वे मेरे को बोल देती थीं। भईया अपने बिजनेस में बिज़ी रहते थे।। तो मैं घर का छोटा मोटा काम कर देता था।

एक बार बबली भाभी ने मेरे को फोन किया कि मार्केट जाना है। मैं फट से तैयार होकर बाइक लेकर बबली भाभी के घर गया।। क्योंकि मैं बबली भाभी को बहुत पसंद करता था।
बबली भाभी और मैं मार्केट गए, वहां हमने सामान खरीदा और बाद में बबली भाभी मुझे अंडरगार्मेंट की दुकान में ले गईं। वहां बबली भाभी ने ब्रा पेंटी खरीद लिए। बाद में हम घर वापस गए।

तब बबली भाभी ने मुझे चाय पीने के लिए रोका, तो मैं भला कैसे ना बोल सकता था। क्योंकि मैं तो बबली भाभी को चोदने की फिराक में था। बबली भाभी मेरे लिए चाय बनाने चली गईं। कुछ देर बाद बबली भाभी ने मुझे चाय दी और रूम में चली गईं। पर मुझे बबली भाभी को कपड़े बदलते हुए देखने की इच्छा हुई मैं रूम के पास गया।

पता चला कि दरवाजा तो खुला हुआ ही है। मैं दरार से देखने लगा। पहले बबली भाभी ने साड़ी उतारी, बाद में ब्लाउज खोला, फिर बबली भाभी ने ब्रा निकाली। पर मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था क्योंकि बबली भाभी की पीठ मेरी तरफ थी।

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जब बबली भाभी बाज़ार से लाई गई नयी ब्रा पहन रही थीं तो वो उनको फिट नहीं रही थी क्योंकि उसकी साइज़ छोटी थी। जब बबली भाभी से ब्रा का हुक नहीं लगा तो बबली भाभी ने मुझे आवाज़ दी और मैं दो पल रुक कर बबली भाभी के पास चला गया। क्योंकि मैं चाहता था उनको पता ना चले कि मैं उधर ही खड़ा था।
मैं रूम में गया, तो बबली भाभी ने मुझसे कहा- मयूर, ये ब्रा का हुक लगा दे।
तो मैं हुक लगाने लगा।
वो फिर भी नहीं लगा तो उन्होंने मुझसे कहा- जा उसी दुकान में जाकर बदल ला।

मैं तुरंत ब्रा लेकर उसी दुकान में गया और बदल कर गया। मैंने थोड़ा फ्लर्ट करने के लिए कहा- बबली भाभी चलो मैं ही पहना देता हूँ।
बबली भाभी ना बोलती रहीं, पर ज़ोर देने पर मान गईं। जब मैंने बबली भाभी को ब्रा पहनाने के लिए साइड में हाथ फेरा तो उनको थोड़ा झटका सा लगा। पर मैं आज उनको चोदने की फिराक में था।

मैं आराम से हुक लगाने की कोशिश कर रहा था, पर दरअसल मैं हुक लगा नहीं रहा था।

तब वो बोलीं- जल्दी लगा ना।। नहीं तो कोई जाएगा।
पर मैंने कहा- आपने सही से पहनी ही नहीं है।

मैंने अपना हाथ आगे ले जाकर सीधा बबली भाभी के मम्मों पर रख दिया और ब्रा सही करने के बहाने बबली भाभी के मम्मों को थोड़ा सहलाने लगा।
बबली भाभी ने कुछ नहीं कहा तो मैं बबली भाभी से बोला- आप घूम जाओ।

बबली भाभी मेरी तरफ घूम गईं और अब मैंने ब्रा सही करने के बहाने उनके मम्मों को सहलाने लगा।

मैंने बबली भाभी को अपनी बांहों में भरा और और अपने हाथ उनकी पीठ पर ले जाकर हुक लगा दिया। पर इस सब में मेरा लंड खड़ा हो गया था और बबली भाभी को टच हो रहा था। शायद बबली भाभी को उसका पता चल गया था, जिससे बबली भाभी भी थोड़ी गरम हो गई थीं।

जब वो कुछ नहीं बोलीं तो मेरी हिम्मत बढ़ गई। मैंने बबली भाभी के गाल पर किस कर दिया।
तब वो एकदम से गुस्सा हो गईं, मुझे बोलने लगीं- ये क्या कर रहे हो?
मैं डर गया।। मेरी फट गई, पर बबली भाभी बोलीं- ये सही नहीं है।
तब मैंने कहा- बबली भाभी मैं आपको प्यार करता हूँ।
पर वो बोलीं- ये सही नहीं है।
मैंने कहा- बबली भाभी सिर्फ़ एक बार किस करने दो।

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वो नहीं मानी, फिर मेरे ज़ोर देने पर वो मान गईं, पर उन्होंने कहा- ये बात किसी को बताना मत।
मैंने कहा- ठीक है।

अब मैं बबली भाभी के होंठ पर किस करने लगा और धीरे धीरे उनकी पीठ पर हाथ फिराता रहा। इसके बाद मैं उनके गले पर किस करने लगा। अब वो भी गरम हो रही थीं, पर मुझे हटाने की कोशिश कर रही थीं।

मैंने अपनी पकड़ मजबूत बना दी और किस करने लगा और सहलाने लगा।

बबली भाभी थोड़ा साथ दे रही थीं, मैंने बबली भाभी मम्मों पर हाथ चलाना शुरू किया। अब वो भी मेरे बालों को सहलाने लगीं। मैंने मैंने बबली भाभी की ब्रा खोल दी और उनके मम्मों को चूसने लगा। मैंने एक हाथ से ऊपर से ही उनकी चुत सहलाने लगा। बाद में मैंने पेंटी में हाथ डाल कर चुत सहलाने लगा। बाद में मैंने बबली भाभी की पेंटी निकाल दी। तब बबली भाभी भी मेरे कपड़े उतारने लगीं और मेरे अंडरवियर के सिवाय सब निकाल फेंका। मैं बबली भाभी के चूतड़ सहला रहा था और मम्मों को चूस रहा था। मैंने बबली भाभी को बेड पे लेटा दिया और उनकी टाँगें खोल कर उनकी झांटों भरी चुत पर अपना मुँह रख कर चुत चाटने लगा। मैंने अपनी जीभ को बबली भाभी की चुत में डाल दी और अन्दर बाहर करने लगा। दस मिनट चुत चूसने के बाद वो झड़ गईं और शांत हो गईं।

मुझे लग रहा था कि मेरा लंड फट जाएगा, मैं बहुत गरम हो गया था। मैंने तुरंत अपना अंडरवियर निकाल कर अपना लंड बबली भाभी की चुत की फांकों पर रखा और एक ही झटके में अन्दर पेल दिया।
बबली भाभी थोड़ा चिल्लाईं और बोलीं- आराम से नहीं डाल सकते थे क्या?

मैंने उनकी बात ना सुनते हुए उनको चोदने लगा। पूरे 20 मिनट की धकापेल ठुकाई के दौरान बबली भाभी 3 बार झड़ चुकी थीं, फिर भी मैं बबली भाभी को चोदता रहा।

थोड़ी देर बाद मैं झड़ने को हुआ तो जल्दी जल्दी धक्के देने लगा। फिर बबली भाभी और मैं दोनों एक साथ झड़ गए।
बबली भाभी ने बोला- जो मज़ा तुम्हारे साथ आया है।। वो मैं अपने पति साथ कभी नहीं ले पाई।

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कुछ मिनट आराम करने के बाद फिर से मेरा लंड खड़ा हुआ तो मैंने बबली भाभी की गांड मारने की इच्छा जताई। मैंने बबली भाभी को गांड मरवाने के लिए बोला तो उन्होंने ना बोल दिया, पर मेरे ज़ोर देने पर मान गईं।

उन्होंने कभी गांड नहीं मरवाई थी तो मैंने बबली भाभी को घोड़ी बनने को बोला और लंड गांड के छेद पर रखकर पेलने की कोशिश की। पर लंड अन्दर नहीं जा रहा था तो मैंने बबली भाभी से तेल की बोतल माँगी।

बबली भाभी ने तेल की शीशी निकाल कर दी। मैंने बहुत सारा तेल उनकी गांड के छेद में डाला और अपने लंड पर लगा लिया। इसके बाद में मैंने लंड को गांड के छेद पर रखा और एक करारा झटका दे मारा। मेरा आधा लंड बबली भाभी की गांड में चला गया।

बबली भाभी ज़ोर से चिल्ला पड़ीं और लंड को बाहर निकालने को बोलने लगीं, पर मैं नहीं माना और मैंने दूसरा झटका दे मारा। अब पूरा लंड बबली भाभी की गांड में चला गया। बबली भाभी फिर चिल्लाईं और उनकी आँखों में आँसू गए।

बाद में मैं बबली भाभी को किस करने लगा और जब बबली भाभी का दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैं झटके मारते हुए बबली भाभी की गांड मारने लगा। करीब 20 मिनट के बाद मैं झड़ गया।



तब से मेरे बबली भाभी के साथ यौन सम्बन्ध बन गए। पर अब बबली भाभी दूसरे शहर में रहने चली गईं। अब सिर्फ़ बबली भाभी के साथ फ़ोन पर बात होती है। अब मैं ठुकाई के लिए कोई नई बबली भाभी ढूढ रहा हूँ।

 
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