रविवार, 21 जनवरी 2024

मामा की बेटी ज्योति को चोदा | bhai bahan sex stories

 मामा की बेटी ज्योति को चोदा 

सबसे पहले तो मैं गुरूजी को धन्यवाद कहना चाहूँगा कि उन्होंने हमें अपने उदास और वीरान जीवन में सेक्स स्टोरीज की रंगीनियाँ भरने का मौका दिया। मैं पिछले दो सालों से सेक्स स्टोरीज को रोज़ ही देखता हूँ। मैं सेक्स स्टोरीज का नियमित पाठक हूँ, मैंने कई कहानियाँ पढ़ी हैं और आज मैं उनसे प्रेरणा लेकर अपनी सच्ची कहानी बताने जा रहा हूँ।



मेरी यह कहानी सच्ची है और मेरे साथ बीते हुए पलों को मैं आप के साथ बाँटना चाहता हूँ।

पहले मैं अपना परिचय दे रहा हूँ : मेरा नाम प्रीतम है, दिल्ली का रहने वाला, 23 साल का, और मैं 5 फीट 5 इंच का हूँ। मेरा रंग गोरा है, मेरा लण्ड 6 इंच का है, मैं देखने में ठीक लगता हूँ।

बात उन दिनों की है जब मैं मेरे मामा के घर गया हुआ था। वैसे तो मैं मामा के घर जाकर सिर्फ़ मजे ही करता था मतलब सिर्फ खाना-पीना अपने में ही मस्त रहता था।

मैंने कभी भी किसी लड़की की आज तक योनि नहीं देखी थी और मैं योनि देखने को बहुत लालयित था। मैं सोचता था कि कभी मुझे योनि के दर्शन करने को मिलेंगे क्या ! और मैं मुठ मार लिया करता था।

मैं एक दिन मेरे मामा के लड़के के कमरे में बैठा टीवी देख रहा था और वहाँ पर मामा की बेटी भी बैठी थी कि अचानक एक पप्पी का दृश्य गया। मैं थोड़ा सा शरमा गया और ज्योति उठ कर चली गई, मैं वहीं पर बैठा रह गया। थोड़ी देर बाद मैंने टीवी बंद कर दिया और मैं किचन में जाकर कुछ खाने को देख रहा था, ज्योति भी वहीं थी।

ज्योति हंस के बोली- क्या चाहिए?

मैंने कहा- ज्योति, मुझे कुछ खाने को चाहिए !

ज्योति बोली- मैं अभी कुछ बना देती हूँ !

तो मैंने कहा- आप क्या बनाएँगी ?

तो ज्योति बोली- जो तू कहे !

तो मैं बोला- गाजर का जूस बना दो !

ज्योति गाजर लेने के लिए नीचे झुकी तो मेरा ध्यान उनके स्तनों पर चला गया और मैं देखता ही रह गया। फिर मैं नजर चुरा के चला गया और बाहर निकल आया।

थोड़ी देर बाद ज्योति जूस लेकर आई और बोली- तेरा जूस तैयार है !

मैंने जूस पी लिया, अपने कमरे में जा कर बैठ गया और कम्प्यूटर चला कर मैं इंटरनेट पर गेम खेलने लगा। पर मेरा ध्यान तो वहीं वक्ष पर था। मैंने गेम खेलना बंद कर दिया और मैंने मामा के लड़के के नाम वाला फोल्डर खोल लिया और देखने लगा तो पता चला कि वो तो ब्लू फिल्म्स देखता है, तो मैं भी देखने लगा और अपने लण्ड को दबाने लगा। धीरे धीरे मुझे मज़ा आने लगा और मैं देखता रहा मैंने ध्यान ही नहीं दिया।

जब मैंने मॉनीटर में ध्यान से देखा तो ऐसा लगा कि मेरे पीछे कोई खड़ा है और मैंने डर कर कम्प्यूटर बंद कर दिया। जैसे ही मैं पीछे मुड़ा तो मैंने देखा कि ज्योति एकदम वहाँ से भाग कर बाथरूम में घुस गई। मैं शरमा कर बाहर गया। अब मुझे अजीब सा लग रहा था कि ज्योति मेरे बारे में क्या सोचेंगी और मैं डर कर रात को खाना खाने के बाद अपने कमरे में जाकर लेट गया। पर मुझे नींद नहीं रही थी। मैं बाथरूम में पेशाब करने गया तो मैंने वहाँ पर ज्योति की ब्रा और पैंटी देखी। मैं तो वहीं पर पागल हो गया और मैं और सब चीजों को सूंघने लगा। मुझे मज़ा आने लगा और मैं यह भूल गया कि मैंने बाथरूम के दरवाज़े की कुण्डी नहीं लगाई है। मैं उन दोनों कपड़ों को सूंघता रहा।

फिर पीछे से आवाज आई- प्रीतम, क्या कर रहे हो ?

मैं डर गया और पीछे मुड़ कर देखा तो ज्योति वहाँ पर खड़ी थी। मैंने वो ब्रा और पैंटी दोनों झट से नीचे फेंक दी और छत पर जाकर बैठ गया। वहीं पर बैठा रहा तो आधा घंटे बाद अचानक ज्योति वहाँ पर आई और बोली- तुम यहाँ छत पर क्या कर रहे हो ?

तो मैं बोला- ज्योति, कुछ नहीं ! मैं तो बस ऐसे ही यहाँ चला आया था।

ज्योति बोली- नीचे अपने कमरे में चलो !

मैं बोला- ज्योति, मुझे नींद नहीं रही ! मैं यहाँ पर बैठ जाता हूँ, जब नींद आएगी तो मैं चला जाऊंगा।

ज्योति बोली- ठण्ड लग जायगी ! चलो नीचे !

मुझे डर लग रहा था, मैं डरता हुआ नीचे चला गया और अपने कमरे में जाने लगा तो ज्योति बोली- कहाँ जा रहे हो?

मैं बोला- ज्योति मैं अपने कमरे में जा रहा हूँ !

ज्योति बोली- वहाँ पर मम्मी चली गई हैं, तुम मेरे कमरे में जाओ !

मैं डरता हुआ ज्योति के कमरे में चला गया। वहाँ पर दो चारपाई थी तो मैं एक पर सो गया और लाइट बंद कर दी।

अचानक मुझे लगा कि मेरी चारपाई पर कोई गया है। मैंने देखा कि ज्योति मेरी चारपाई पर बैठी है और ज्योति का हाथ मेरे लण्ड पर रखा हुआ था।

मैं बोला- ज्योति, आप क्या कर रहे हो ?

ज्योति बोली- साले, इतना शरीफ मत बन ! तुझे सब पता है कि मैं क्या कर रही हूँ।

ज्योति बोली- जब तू मेरे स्तन देख रहा था, तब तू क्या कर रहा था?

मैं बोला- ज्योति, वो तो गलती से दिख गए थे !

तो ज्योति बोली- साले तू मेरी पैंटी क्यों सूंघ रहा था?

मैं बोला- चलो छोड़ो, अब तो मज़े ले लो !

ज्योति बोली- अब आया लाइन पर !

तो मैंने झट से ज्योति के स्तन पकड़ लिए और दबाने लगा। ज्योति बोली- साले, हाथों में जान नहीं है क्या ? जोर से दबा !

तो मैं जोर से दबाने लगा फिर ज्योति मैंने ज्योति के होठों पर पप्पी ली और ज्योति के होठों को जोर से चूमने लगा। ज्योति को मज़ा आने लगा, वो भी मेरे होठों को जोर से चूमने लगी और मैं इतना मदहोश हो गया कि मैंने होठों को चाटना शुरू कर दिया। ज्योति भी पागल हो गई और मेरे होठों को वो भी चाटने लगी।

मैंने ज्योति के हाथों को अपने लण्ड पर रख दिया और कहा- मेरी मुठ मारो !

तो ज्योति भी जोर से मुठ मारने लगी। फिर मैंने ज्योति के पेट पर हाथ फेरा और ज्योति के पेट को चूमने लगा। मैंने ज्योति के पेट को चूम चूम कर गीला कर दिया और फिर ज्योति की कमर को चूमने लगा। ज्योति के बदन पर एक भी बाल नहीं है वो एक दम चिकनी हैं।

ज्योति तड़फ़ने लगी और बोली- जल्दी से कुछ कर, नहीं तो मैं मर जाउँगी।

मैंने ज्योति की गांड पर जीभ लगा दी। ज्योति तो बिलकुल पागल हो गई और बोली- मैं तो मर गई, क्या गरम जीभ है तेरी ! और लगा !

मैंने ज्योति की गांड को भी चाटना शुरू कर दिया। फिर क्या था, ज्योति को तो होश नहीं था, वो तो पागल हो रही थी।

गुलाबी योनि से रिस रिस कर नमकीन पानी निकल रहा था, उसे चाटने में मुझे भी मजा रहा था और ज्योति अपनी गांड उठा उठा कर मुखचोदन करा रही थी।

मैंने जैसे ही उसकी योनि पर जीभ लगाई तो वो तो पागल ही हो गई और बोली- जोर से चाट ! जल्दी से मेरी मार ! नहीं तो मैं मर जाउंगी !

तो मैंने अपना लण्ड निकाल कर उनके मुँह में डाल दिया और वो लण्ड देखते ही चिल्ला उठी- यह क्याऽऽऽ ?

मैंने कहा- लण्ड !

बोली- इतना बड़ा ऽऽ? मैं मर जाऊंगी !

मैंने कहा- एक बार मुँह में लेकर तो देख !

ज्योति बोली- मजा रहा है !

वो मेरे लण्ड को कुत्ते की तरह चाट रही थी। फिर मैंने अपना लण्ड उनके मुँह में से निकाल कर उनकी योनि में डाल दिया और जोर जोर से झटके मारने लगा।

वो बोल रही थी- और जोर से मार !

और सिसकियाँ भरने लगी- आआआआ ऊऊऊऊऊऊओ जोर से मार साले !

तो मैंने उनकी गांड में डाल दिया तो वो बोली- मार दिया कुत्ते ! आराम से मार !

मैंने और जोर से शुरू कर दिया।

ज्योति बोली- साले, बाहर निकाल ! दर्द हो रहा है !

तो मैं बोला- ज्योति, बस थोड़ा और !

ज्योति बोली- साले, मेरी गांड फट जायगी !

फिर मैंने बाहर निकाला और योनि में डाल दिया। फिर ज्योति बोली- जोर से मार !

तो मैंने जोर से झटके मारने शुरू कर दिया। ज्योति के मुँह से निकल रहा था- आआआआअ ऊऊऊऊओ आआआ ऊऊऊऊऊ !

मैंने फिर से ज्योति के मुँह में डाल दिया और बोला- चूस !

ज्योति मेरे लण्ड को लॉलीपोप की तरह चाट रही थी। ज्योति अपना आपा खो बैठी थी और मेरे लण्ड को बुरी तरह चूस रही थी।

ज्योति लण्ड चूसने के बाद बोली- प्रीतम, मुझे पागल बना दे ! मुझे बस चोदता जा ! मैं आज जी भर के चुदना चाहती हूँ।

मैंने फिर से लण्ड ज्योति की योनि में डाल दिया और ज्योति को कहा- अब मुझ में इतना दम नहीं है कि झटके मार सकूँ। आप ही कूद लो मेरे लण्ड पर !

ज्योति मेरे लण्ड पर कूदने लगी, मैंने कहा- योनि में मज़ा नहीं आएगा ! आप अपनी गांड में फिर घुसवा लो !

ज्योति बोली- मेरी गांड फट जाएगी !

तो मैंने कहा- कुछ नहीं होता !

तो ज्योति ने गांड में घुसवा लिया और मैंने जोर से झटका मार कर ज्योति की गांड में घुसा दिया। ज्योति धीरे-धीरे से झटके मारने लगी और मज़ा आने लगा। मुझ में फिर से जोश गया और मैंने ज्योति की गांड में जोर-जोर से झटके मारने शुरू कर दिया।

मैंने लंड को बाहर निकाला और वापस ज़ोऱ से अंदर डाला और धीरे धीरे से चोदने लगा, साथ में चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा।

मैंने उससे पूछा- कैसा लग रहा है?

तो बोली- प्लीज़ मुझे मत पूछो !

मैंने उससे कहा- ज्योति, तुमको आज मैंने एक बहन से पत्नी बना दिया है, तुम्हारी आज प्रौन्नति हुई है, तुझे चोदने में बहुत मज़ा रहा है, ऐसा मज़ा तो मुझे कभी नहीं आया !

उसने भी मेरे होंठों को अपने मुँह में भर लिया। वाह क्या मुलायम होंठ थे, जैसे संतरे की नर्म नाज़ुक फांकें हों। कितनी ही देर हम आपस में जकड़े रहे, एक दूसरे को चूमते रहे। अब मैंने अपना हाथ उसकी योनि पर फिराना चालू कर दिया। उसने भी मेरे लंड को कस कर हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। मैंने जब उसके स्तन दबाये तो उसके मुँह से सीत्कार निकालने लगी- ओह

अब उसने अपने पैर ऊपर उठा कर मेरी कमर के गिर्द लपेट लिए थे। मैंने भी उसका सिर अपने हाथों में पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। जैसे ही मैं ऊपर उठता तो वो भी मेरे साथ ही थोड़ी सी ऊपर हो जाती और जब हम दोनों नीचे आते तो पहले उसके नितम्ब गद्दे पर टिकते और फिर गच्च से मेरा लंड उसकी योनि की गहराई में समां जाता। वो तो मस्त हुई आह उईई माँ ही करती जा रही थी।

अब मैं उसके मुँह को पकड़ कर चूमने लगा और उसका मुँह खोलकर जीभ अंदर डाल कर घुमाने लगा। एक हाथ उसकी योनि पर ही फिरा रहा था। अब योनि से भी पानी आने लगा था और मेरे हाथ गीले हो गए। मैंने गीला हाथ उसे दिखाते हुए कहा- ज्योति, देखा अब तेरी योनि भी साथ दे रही रही है !

अब मैंने उसकी योनि को पूरा मुँह में ले लिया और जोर की चुसकी लगाई। अभी तो मुझे दो मिनट भी नहीं हुए होंगे कि उसका शरीर अकड़ने लगा और उसने अपने पैर ऊपर करके मेरी गर्दन के गिर्द लपेट लिए और मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया। इतने में ही उसकी योनि से काम रस की कोई 4-5 बूँदें निकल कर मेरे मुँह में समां गई। आह, क्या रसीला स्वाद था। मैंने तो इस रस को पहली बार चखा था। मैं उसे पूरा का पूरा पी गया।

फिर मेरा छुटने को हो गया तो मैंने कहा- ज्योति, मेरा छुट रहा है !

तो वो बोली- मेरे मुँह में छोड़ दे।

तो मैंने उनके मुँह पर छोड़ दिया और शान्त हो गया।

थोड़ी देर बाद अचानक अपने लंड पर किसी के स्पर्श से मैंने आंखे खोली तो देखा कि ज्योति उससे खेल रही है और उसे खड़ा करने की कोशिश कर रही है। मेरे आँख खोलते ही मुझे अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा। मैं समझ गया कि अब भी ज्योति की चाहत पूरी नहीं हुई तो मेरा फिर से खड़ा हो गया और मैंने फिर से ज्योति की योनि में घुसा दिया। इस बार मैंने लण्ड योनि पर रखा और धीरे-धीरे नीचे होने लगा और लण्ड योनि की गहराइयों में समाने लगा। योनि बिल्कुल गीली थी, एक ही बार में लण्ड जड़ तक योनि में समा गया और हमारी झाँटे आपस में मिल गईं। अब मेरे झटके शुरु हो गए और ज्योति की सिसकियाँ भी

ज्योति आआआहहहह अअआआआहहह करने लगी। कमरा उनकी सिसकियों से गूँज रहा था। जब मेरा लण्ड उनकी योनि में जाता तो फच्च-फच्च और फक्क-फक्क की आवाज़ होती। मेरा लण्ड पूरा निकलता और एक ही झटके में योनि में पूरा समा जाता। ज्योति भी गाँड हिला-हिला कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने झटकों की रफ्तार बढ़ा दी, अब तो खाट भी चरमराने लगी थी। पर मेरी गति बढ़ती जा रही थी। हम दोनों पसीने से नहा रहे थे जबकि सर्दी का मौसम था।

और फिर ज्योति बोली- धीरे मार ! तूने तो मेरी योनि ही फ़ाड़ दी।

मैंने कहा- अभी तो कुछ नहीं हुआ है, अभी तो काम बाकी है !

मैंने तुरंत ज्योति की गांड में घुसा दिया। फिर क्या था, ज्योति चिल्लाने लगी और बोली- साले, तूने तो आज मेरी गांड भी फ़ड़ दी और मेरी योनि भी !

मैंने कहा- अभी तो चूचियाँ भी बाकी हैं !

मैंने झट से चूचियों पर कब्ज़ा कर लिया और उन्हें दबाने और चूसने लगा और मुंह में लण्ड की पिचकारी मार दी।

अब जब भी मैं मामा के घर जाता हूँ और जब हमें मौका मिलता है तो हम सेक्स कर लेते हैं और म़जा ले लेते हैं।

कभी घोड़ी-कुतिया तो कभी किचन में एक टांग पर। कुल मिलाकर ज्योति के साथ बिताये वो हर पल आज भी मेरी आंखों के सामने आते हैं तो बस उसे चोदने की इच्छा जागृत हो जाती है।

उम्मीद है कि मेरी पहली कहानी आप सभी को पसंद आई होगी


 
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